हिन्दी कविता- जी चाहता है/अंजू पाण्डेय || Best Hindi Poem Jee Chahta hai/Anju Pandey

 

Best Hindi Poem Jee Chahta hai

जिंदगी को खुल के जीने को जी चाहता हैं,

हर तमन्ना पूरी करने को जी चाहता हैं।

लबो पे जो अधूरी है मुस्कान मेरे,

अब खिलखिलाने को जी चाहता हैं।।


दिमाग में चलती रहती हैं उलझने,

मन में जाने कितनी बेचैनी।

तेरे कांधे पे सर रखकर,

तेरी बातों की गजल सुनने को जी चाहता हैं।।


थक चुकी हूँ मैं यहाँ वहाँ भाग भाग के,

इन अँधेरी रातों में जाग जाग के।

एक सुकून का तकिया लगाकर,

निश्चिन्त सो जाने को जी चाहता हैं।।


भीगी हैं जाने कितनी बार ये आँखें,

कुछ छुटे लोगों से कुछ बीते लम्हों में।

सावन की रिमझिम बारिश में,

भीग जाने को जी चाहता हैं।।


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