तब बचपन याद आता है/आशुतोष राणा || Tab Bachpan Yad Ata Hai Poem/ Ashutaosh Rana


जब हम रो नही पाते

सुख से सो नही पाते

जब हम खो नही पाते

तब बचपन याद आता है

जब चिंता सताती है 

हमारे तन को खाती है

जब भी मन नही मिलता

तब बचपन याद आता है

जब हम टूट जाते है 

जब अपने रूठ जाते है 

जब सपने सताते है 

तब बचपन याद आता है

बच्चे हम रह नही पाते 

बड़े हम हो नही पाते

खड़े भी रह नही पाते

तब बचपन याद आता है

किसी को सह नही पाते

अकेले रह नही पाते

किसी को कह नही पाते 

तब बचपन याद आता है।

 

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