About us
Contact us
Privacy Policy
मुख्य पृष्ट
रचनाकार सूची
स्व प्रकाशन
प्रसिद्ध रचनाएँ
_प्रेम
_उदासी
_प्रेरणादायक
_देश भक्ति
काव्य प्रतियोगिता
_विजेता रचनाकार सूची
__2020
__2023
_निर्णायक समिति
संपादक समिति
_संपादक कक्ष
_सलाहकार समिति
संपर्क
मुख्यपृष्ठ
पद्य
अग्निपथ ~हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan
अग्निपथ ~हरिवंश राय बच्चन | Agnipath Poem By Harivansh Rai Bachchan
हिन्दी काव्य कोश
Agnipath poem by Haribansh Rai Bachchan
वृक्ष हों भले खड़े,
हों घने हों बड़े,
एक पत्र छाँह भी,
माँग मत, माँग मत, माँग मत,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
तू न थकेगा कभी,
तू न रुकेगा कभी,
तू न मुड़ेगा कभी,
कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
यह महान दृश्य है,
चल रहा मनुष्य है,
अश्रु स्वेद रक्त से,
लथपथ लथपथ लथपथ,
अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
पद्य
प्रसिद्ध रचनाएँ
प्रेरक कविता
हमसे जुड़ें
यूट्यूब से जुड़ें
Facebook
सूचना
पत्रिका में अपनी रचनाओं का स्वयं करें प्रकाशन || tmkavykosh@gmail.com पर अपने नाम के साथ लेखन विधा जैसे कविता, कहानी, आलोचना तथा व्यंग आदि लिखकर ई -मेल कर बनवायें अपनी रचनाकार प्रोफाइल और प्रतिदिन निःशुल्क करें अपनी रचनाओं का प्रकाशन || ई-मेल पर रचनायें भेजने की आवश्यकता नहीं है || आपको समिति कोश पत्रिका पर कैसे आपकी रचनाओं को प्रकाशित करना है उसका प्रशिक्षण प्रोफाइल बनने के बाद देगी || आपकी 20 रचनाओं के प्रकाशन के बाद आपका नाम रचनाकार सूची में जोड़ दिया जाएगा ||
श्रेणी
कविता
प्रतियोगिता विषय
प्रेरक कविता
साप्ताहिक काव्य प्रतियोगिता
ग़ज़ल व शेर
इसे भी पढ़ें
50 प्रसिद्ध हिंदी कविताएँ/50 Hindi Poems of famous poets, Hindi Kavita
हे भारत के राम जगो/Hey Bharat Ke Ram Jago-आशुतोष राणा/Ashutosh Rana -हिन्दी काव्य कोश
मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है/रामधारी सिंह दिनकर -हिन्दी काव्य कोश
बशीर बद्र के 100 चुनिंदा शेर~ हिन्दी काव्य कोश
25+ Famous Harivansh Rai Bachchan Poems In Hindi/हरिवंश राय बच्चन की ये हैं श्रेष्ठ 25+ कविताएं
Hindi Poem On Water | जल पर 5 प्रसिद्ध कविता/पानी पर उत्कृष्ट हिन्दी कविता
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी/सुभद्रा कुमारी चौहान- हिन्दी काव्य कोश
कृष्ण की चेतावनी (रश्मिरथी)-रामधारी सिंह दिनकर-हिन्दी काव्य कोश
हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी- मैथिलीशरण गुप्त -हिन्दी काव्य कोश
रामधारी सिंह 'दिनकर'~सिंहासन खाली करो कि जनता आती है
हमसे जुड़ें